परीक्षा पड़ाव है, ठहराव नहीं :- सन्दीप मिश्रा

ARTICAL BY :- सन्दीप मिश्रा 


 इन दिनों अनायास ही तनाव घरों के चारों ओर  तना हुआ है।  बच्चों के बस्ते, मां बाप के चेहरे, विद्यालय के ब्लैकबोर्ड बस एक ही चर्चा है कि परीक्षा है। ठहरिये सोचिए परीक्षा आपके लिए है या आप परीक्षा के लिए?  ध्यान रहे परीक्षा एक पड़ाव है,ठहराव नहीं। कोई भी परीक्षा जिंदगी से बड़ी नहीं, ध्यान रहे परीक्षा का परिणाम आप की जिंदगी पर बोझ, दबाव, रूकावट बन रहा है तो रुको, सोचो, विचार करो। जीत-हार  परिणाम के मायने तभी हैं जब ज़िन्दगी है। एक शेर लिखा था कभी-



जिंदगी को हार जीत से मत तौलो, जी लो  ये जिंदगी है प्यारे कोई इंमतिहान नहीं ।।


हार और जीत प्रयास के परिणाम से ज्यादा कुछ नहीं, योजना, लगन, निष्ठा लक्ष्य केंद्रित प्रयास सफलता की मंजिल तय करते हैं। इन बिंदुओं पर हमारी कितनी तैयारी है, यही भविष्य में जीत का आधार बनेंगे। किसी से किसी की तुलना कभी हो ही नहीं सकती बार-बार अपने बच्चों की तुलना कर-कर कोसने वाले मां-बाप कई बार हीरे को कोयला बनाने की ठान लेते हैं। हुनर पहचानने के बजाय दूसरों के गुण अपने बच्चों पर थोपने से बाज़ आये। अभिभावक आप अनमोल लाल संभाले हुए है। उसे उसकी रुचि उसकी पसंद उसके गुण के आधार पर जिंदगी जीने में सहायक अवसर की ओर बढ़ने में सहायता दे। किताबों के पन्ने रोजी-रोटी दे सकते हैं, खुशियों का रंग तो जिंदगी में हसरतों का पूरा होना है।



 शिक्षा का मकसद महज इतना ही है कि हम बच्चों को अच्छा इंसान बनाएं सफल तो वह स्वयं हो जाएंगे। जिंदगी दोबारा नहीं मिलेगी, शानदार ही नहीं यादगार बनाने के लिए जियो। अपनी खुशियों का विस्तार इतना बड़ा करो कि वो सबकी खुशी बन जाये। देश में सब इंजीनियर, वैज्ञानिक, डॉक्टर बनने के लिए ही नही जन्मे गायक, कलाकार, खिलाड़ी, लीडर के बिना भी मुल्क के सुनहरे तस्वीर की कल्पना नहीं की जा सकती। खुद को जानो, खुद से बात करो, खुद को पहचानो, और फिर वह करो जिसके लिए बने हो। देखना फिर काम बोझ नहीं वरदान बन जाएगा, परीक्षा खौफ नहीं उत्सव बन जाएगी और मंच मौका नहीं मान्यता बन जाएगा। मैंने लिखा था कि


 "कुछ भी मुश्किल, कुछ भी आसान नहीं,


 इसीलिए मैं परेशान नहीं "।।



आप आने वाले कल के भविष्य हो, चमकते सितारे हो। विद्यालय के बाहर एक बहुत बड़ी दुनिया है जहां डिग्री, नंबर, पोजिशन,भाषा नहीं हुनर बोलता है। तेंदुलकर, मेरी कॉम, विल गेट, लाल बहादुर शास्त्री, शहीद ए आजम भगत सिंह, कबीर, रहीम, मीरा,भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम किसी संस्थान की डिग्री के मोहताज मात्र नहीं रहे बल्कि स्वयं में संस्थान बन गए। अवसर है आपके पास महज एक सर्टिफिकेट के लिए लड़ रहे हो या जिंदगी को उदाहरण बनाने के लिए बढ़ रहे हो।